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पठान कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर की सेवा, क्रिकेट के द्वारा

By हरीश कोटियन
March 04, 2019 11:10 IST
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'जम्मू - कश्मीर एक बहुत ही बड़ा राज्य है, तो प्लेयर्स को एक साथ लाकर उन्हें सही राह देना आसान नहीं था, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें इसका फ़ायदा ज़रूर मिलेगा।'

 

फोटो : इरफ़ान पठान , बायें , रसिख सलाम के साथ। फोटोग्राफ़ : रसिक सलाम के सौजन्य से।

कश्मीर घाटी हाल के दिनों में गलत कारणों से ही सुर्खियों में रही है। लेकिन इरफ़ान पठान के रूप में जम्मू-कश्मीर को एक उम्मीद की किरण मिली है, जो जम्मू-कश्मीर के युवाओं को खेल-कूद में ऊंचाइयाँ हासिल करने का एक मंच देने के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

भारतीय टीम में खेल चुके जाने-माने ऑल राउंडर, जिन्हें पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम का कोच और मेन्टर बनाया गया है, पिछले कुछ वर्षों में प्रतिभाशाली युवाओं को ढूंढने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इनमें से एक है, 17-वर्षीय फास्ट बोलर रसिख सलाम, जिसे इस साल के आइपीएल के लिये मुंबई इंडियन्स ने चुन लिया है। इरफ़ान ने श्रीनगर के जिला सेलेक्शन कैम्प में रसिख को ढूंढा।

रसिख जम्मू और कश्मीर से आइपीएल में चुने जाने वाले  सिर्फ तीसरे क्रिकेटर हैं। उन्हें मुंबई इंडियन्स ने उनकी 20 लाख की बेस प्राइस पर खरीदा है।

यह तेज गेंदबाज किशोर दक्षिण कश्मीर के कुलगाम नामक एक छोटे से गाँव से है, और विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में शानदार प्रदर्शन के बाद पिछले ही साल उसे राज्य की टीम में जगह मिली।

"अगर उसे आइपीएल में खेलने का मौका मिले, तो वो बहुत अच्छा खेलेगा," इरफ़ान ने पूरे उत्साह के साथ रिडिफ़.कॉम  के हरीश कोटियन को बताया।

"उसका ऐक्शन बहुत ही शानदार है और वो बॉल को अच्छा स्विंग कर लेता है। उसका रिदम भी बढ़िया है। बॉल को दोनों तरफ़ स्विंग कर पाना किसी भी बोलर के लिये एक प्लस पॉइंट होता है। वो बॉल को देर से स्विंग कर सकता है, जो कि फास्ट बोलर के लिये बहुत ही अच्छी बात है," इरफ़ान ने बताया।

 

"उसकी बोलिंग का पेस अच्छा है, जिसका एवरेज तक़रीबन 135 kmph है। उसका ऐक्शन सेटल हो जाने पर वो और भी अच्छा खेलेगा। वो बॉल को फिसलाता है, बॉल उम्मीद से कहीं ज़्यादा तेज़ आती है और वो किसी भी टॉप बल्लेबाज़ पर भारी पड़ सकता है," टेस्ट हैट-ट्रिक लेने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय ने अपनी खोज के बारे में कहा।

29 टेस्ट और 120 ODI खेलने वाले इरफ़ान ने एक ही बॉल में इस युवा की क्षमता को पहचान लिया था।

"रसिख जून में जिला सेलेक्शन कैम्प में शामिल हुआ था। उसने जब पहली बॉल डाली, तभी मैं समझ गया था कि उसमें ऊपर जाने की काबिलियत है," इरफ़ान ने कहा।

"और जब उसने दूसरी बॉल डाली, तो मैं उसे अलग ले गया और दिन भर उसे बोलिंग नहीं करने दी," उन्होंने याद करते हुए कहा।

"मुझे पता था कि उसमें हुनर है और उसे सुरक्षित रखते हुए अगले लेवल के लिये तैयार करने की ज़रूरत है। अभी भी हमें उसके रन अप, उसके ऐक्शन, उसके फॉलो थ्रू जैसे कई एरियाज़ में काम करने की ज़रूरत है। ऐक्शन में मदद के लिये मैंने उसकी वीडियोज़ टी ए शेखर सर को भेजी है," इरफ़ान ने कहा। "उन्होंने भी कुछ सुझाव दिये, जिससे काफी मदद मिली।"

"हम उसके साथ काम करने के लिये एक कोच -- मिलाप मेवाडा को लेकर आये। जब भी बड़ौदा में अपने घर जाता था, खाली समय में उसकी बोलिंग के वीडियोज़ देखता था," इरफ़ान के कहा।

"उसने शरीर को मज़बूत बनाने पर कभी मेहनत नहीं की थी, इसलिये हमने उसकी स्ट्रेन्थ पर काम करने की शुरुआत की और उसे भारी वेट्स दिये। हमने सबसे पहले उसके बोलिंग ऐक्शन के लोडिंग पार्ट को पास कराया।"

"तो, बात चाहे मैदान के भीतर की हो, या बाहर की, हममें बातें बहुत होती थी। उसके जम्मू-कश्मीर से दूर होने पर भी मैं हमेशा फोन कॉल्स और चैट्स पर उससे जुड़ा रहता था," इरफ़ान ने बताया।

"जब आप किसी युवा को तैयार करना चाहते हैं, आपको उसके साथ न रहने पर भी हमेशा उससे जुड़े रहना पड़ता है," पूर्व भारतीय ऑल - राउंडर ने आगे कहा।

आने वाला आइपीएल युवा रसिख के करियर का एक शानदार मंच हो सकता है। तीन बार आइपीएल जीतने वाली टीम मुंबई इंडियन्स में इस कश्मीरी किशोर को विश्व क्रिकेट के कई दिग्गजों के साथ खेलने और ट्रेन करने का मौका मिलेगा।

"आइपीएल में खेलना उसके लिये बहुत अच्छा होगा। टीम और भारत के साथ-साथ दुनिया भर के स्टार प्लेयर्स के साथ खेलकर उसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा। उसे पहली बार ऐसे वातावरण में रहने का मौका मिलेगा और यह उसके लिये बहुत ही बड़ा मौका होगा," इरफ़ान ने कहा।

"उसका दिमाग काफ़ी तेज़ है, उसके पिता टीचर रह चुके हैं और उन्होंने अपने युवा बेटे पर पॉज़िटिव असर छोड़ा है। वह समझदार लड़का है और सीखने की चाह रखता है, जो कि बहुत ज़रूरी है।"

"मुझे लगता है कि वो इसी तरह सीखता रहेगा और एक से दो साल में बड़े लेवल पर क्रिकेट खेलने के लिये तैयार हो जायेगा।"

 

फोटो : विजयवाडा में चल रहे मुश्ताक़ अली T20 टूर्नामेंट में इरफ़ान जम्मू - कश्मीर टीम के साथ। फोटोग्राफ़ : इरफ़ान पठान के सौजन्य से

रसिख के साथ-साथ, इरफ़ान को एक और प्रतिभाशाली युवा दिखाई दिये हैं, लेफ़्ट आर्म फ़ास्ट बोलर मुजतबा यूसुफ़।

इरफ़ान के सुझाव पर, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट असोसिएशन ने पहली बार एक जिला-स्तरीय टूर्नामेंट आयोजित किया, जिसमें लगभग 40,000 युवाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका मिला।

"इसी टूर्नामेंट में रसिख पहली बार नज़र में आया। वो जम्मू या श्रीनगर जैसे बड़े शहर से नहीं है, बहुत ही छोटे से गाँव से है। इसी तरह, मुजतबा भी छोटे से गाँव से ही है। मुझे ख़ास तौर पर छोटे गाँवों और जिलों से प्रतिभाशाली युवा ढूंढने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी," इरफ़ान ने बताया।

"ये काफ़ी मेहनत का काम है। मैं सोपोरे से कुपवाड़ा तक कई जिलों और कई जगहों पर गया। मैंने कई युवा देखे। जम्मू-कश्मीर एक बहुत ही बड़ा राज्य है, तो प्लेयर्स को एक साथ लाकर उन्हें सही राह देना आसान नहीं, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें इसका फ़ायदा ज़रूर मिलेगा।," उन्होंने आगे कहा।

इरफ़ान को जम्मू-कश्मीर का ऑफ़र स्वीकार करने के लिये कई कुर्बानियाँ देनी पड़ीं, जिसमें विदेश में क्रिकेट खेलने के काफी फायदे वाले ऑफ़र और टेलीविज़न कमेंट्री के मौके को छोड़ना शामिल है।

"मैं इंडिया के लिये बहुत गेम्स खेल चुका हूं और मुझे लगा कि अब मुझे इस खेल का कर्ज़ चुकाना चाहिये," उन्होंने कहा।

"जब मैं जम्मू-कश्मीर के क्रिकेट अधिकारियों से मिला, तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब जम्मू और कश्मीर में खेल का विकास करके भारतीय क्रिकेट के लिये कुछ करने का समय आ गया है।"

"मुझे खुशी है कि जब से मैं आया हूं, तब से टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और एक लड़के को आइपीएल के लिये भी चुन लिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में मैं जम्मू-कश्मीर क्रिकेट को और भी ऊंचाइयों पर ले जा सकूंगा।"

"मेरा स्टार स्पोर्ट्स के साथ एक कमेंट्री कॉन्ट्रैक्ट था। मैं कुछ दिन नहीं जा पाया क्योंकि मैं यहाँ क्रिकेटर्स की मदद में लगा था। कमेंट्री में आपको पैसे ज़्यादा मिलते हैं, लेकिन खेल के लिये कुछ करना मेरे लिये ज़्यादा खुशी और संतुष्टि की बात है।," इरफ़ान ने बताया।

जब हमने उनसे पूछा कि लंबे समय से आतंक की गिरफ़्त में जकड़ी इस घाटी में क्या क्रिकेट युवाओं की सोच को एक नयी दिशा दे पा रहा है, तो जवाब में इरफ़ान ने कहा: "मुझे टीम के लिये क्रिकेट खेलने और खिलाड़ियों पर एक पॉज़िटिव असर छोड़ने के लिये लाया गया है। और मैं सिर्फ इसी काम में रुचि लेता हूं।"

"मुझे राज्य की टीम के लिये खेलने और अपने अनुभव के साथ खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करने की ज़िम्मेदारी दी गयी थी। मुझे इस चुनौती में मज़ा आ रहा है," इरफ़ान ने बताया।

"मैंने क्रिकेट के मैदान में रिज़ल्ट दिये हैं। हमने सितारों से भरी तमिल नाडु की टीम को हराया (अक्टूबर में विजय हज़ारे वन -डे टूर्नामेंट में), जिसमें विजय शंकर जैसे खिलाड़ी थे। हम अपनी सीमाओं से आगे निकल रहे हैं, जो बहुत ही अच्छी बात है।"

"मैंने राज्य की टीम और जिला-स्तरीय टीम को चलाने के तरीकों से जुड़े कुछ सुझाव दिये हैं, जिन्हें लागू करने पर जम्मू-कश्मीर अगले कुछ सालों में और भी मज़बूत हो जायेगा।"

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