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ऐसे जीत सकते है मोटापे या जीवनशैली की जंग!!

Last updated on: July 19, 2019 10:19 IST

योग आचार्य शमीम अख़्तर ने बताया कि आप कैसे मोटापे के शिकंजे से बाहर आ सकते हैं।

silviarita/Pixabay.com

*फोटोग्राफ: silviarita/Pixabay.com के सौजन्य से

जहाँ इस बात पर बहस छिड़ी हुई है कि मानव इतिहास की सबसे प्रभावशाली पीढ़ी किसे कहा जा सकता है, वहीं एक बात तो साफ़ है, कि मानव इतिहास की सबसे अस्वस्थ पीढ़ी तो आज की मिलेनियल्स कही जाने वाली पीढ़ी ही है।

उनसे पहले बेबी बूमर्स और जेनरेशन एक्स आग से खेल चुके हैं (धुम्रपान एक सामाजिक प्रतिष्ठा की चीज़ मानी जाती थी) और एड्स जैसी बीमारियों को लेकर आये हैं, लेकिन आज मिलेनियल्स को सबसे ज़्यादा अस्वस्थ माना जा रहा है।

क्योंकि आँकड़े चौंकाने वाले हैं।

कैंसर रीसर्च यूके के अनुसार मध्य आयु में पहुंचने तक 10 में से सात मिलेनियल्स मोटापे का शिकार होंगे। और इसका मतलब है मोटे लोगों को होने वाली बीमारियाँ -- क्रोनिक किडनी डिसीस, डायबिटीज़, हृदय संबंधी समस्याऍं और कई प्रकार के कैंसर भी चरम सीमा पर होंगी।

इस स्थिति के कई कारण हैं - जिनमें से कुछ तो पता हैं और कुछ का अनुमान लगाया गया है।

Kind courtesy Shilpa Shetty/Instagram

*फोटोग्राफ: Shilpa Shetty/Instagram के सौजन्य से

खाद्य बाज़ार नीतियाँ

मिलेनियल्स को तुरंत असर करने वाले समाधान चाहिये।

हालांकि कहने को तो वे स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन उन्हें अपने टेबल पर खाना तुरंत और आसानी से चाहिये।

और बाज़ार उनकी इस ज़रूरत को पूरा करने के लिये स्वादिष्ट गर्म-करो-और-खाओ वाले पैकेजेज़ लेकर आया है, जो स्वस्थ और वसारहित होने का दावा करते हैं।

यह बात सभी को पता है कि वसारहित का मतलब है सामान्य स्तरों से कम वसा होना।

साथ ही आपको शेल्फ़-लाइफ़ बढ़ाने के लिये मिलाये जाने वाले ऐडिटिव्स; 'डाइट' फूड के नाम से बेची जाने वाली चीज़ों में छुपी हुई कैलरीज़; आपकी दादी के हाथ के खाने जितनी स्वस्थ होने का दावा करने वाली ड्रेसिंग्स; कई तरह के पदार्थों से भरी आपको स्वस्थ लगने वाली डिप्स; कैलरीज़ से भरे चीनी के विकल्पों  का भी ध्यान रखना चाहिये।

औद्योगिक कृषि ने पिछले कुछ दशकों में कृषि को इस हद तक 'बदल' दिया है कि अब खाद्य शृंखला के माध्यम से ही मोटापा परोसा जा रहा है।

सब्ज़ियों और फलों की कटाई अब प्रकृति के अनुसार नहीं होती।

इन सबका मतलब यह है कि स्वस्थ और स्वादिष्ट लगने वाले कई खाद्य पदार्थ सीधे आपके मोटापे को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

क्या किया जाए 

धीमे आहार और जैविक पद्धति की ओर वापसी के रूप में इस स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

वर्तमान में इनमें से कुछ विकल्प मोटापा बढ़ाने वाले विकल्पों से कहीं ज़्यादा महँगे हैं। लेकिन, आपके स्थानीय किसान के बाज़ार को एक अच्छा और किफ़ायती स्रोत माना जा सकता है।

तेज़ समाधान पसंद करने वाले लोगों के लिये, आज कई ऐसे उपकरण हैं, जो उनकी सहायता कर सकते हैं -- शर्बत मेकर्स, आइस क्रीम मेकर्स, जूसर्स, ब्लेंडर्स और चॉपर्स के साथ अब सलाद जैसी चीज़ें बनाना पहले से कहीं ज़्यादा आसान है।

ऑनलाइन ट्यूटोरियल आपको आसानी से फॉलो करने और जल्दी बन जाने वाली रेसिपी दिखाते है।

शुरुआत में ये चीज़ें झंझट भरी लग सकती हैं, लेकिन घर का खाना (पैकेज्ड के मुकाबले) स्वस्थ विकल्पों की ओर बढ़ने का सबसे आसान और तेज़ तरीका है, जो मोटापे को नियंत्रित रखने में आपकी मदद करता है।

Kind courtesy Thums Up

फोटोग्राफ: थम्स अप के सौजन्य से

मीठे पेय

इनकी शुरुआत एक प्रेरणा के रूप में हुई - बोतलबंद पेय, जिनका प्रचार सुपर-कूल सुपरस्टार्स करें, उनकी मांग तो बढ़नी ही है।

मीठे पेय पदार्थों - जिनमें से कई ख़ुद को स्वस्थ विकल्प या कम कैलरी वाले पेय पदार्थ, या फिर फलों का रस बताते हैं - से सबसे ज़्यादा प्रभावित पीढ़ी मिलेनियल्स ही है।

इन पेय पदार्थों की आदत लग जाती है, ये पूरी तरह कैलरीज़ से लदे होते हैं और इनमें पोषण बिल्कुल नहीं होता, साथ ही इनमें फॉस्फेट्स की आपत्तिजनक मात्रा होती है, जो गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और डिप्रेशन (विषाद) या सुस्ती (या दोनों) का कारण बन सकते हैं।

स्वस्थ रहने के लिये शरीर में पानी की मात्रा बनाये रखने की आवश्यकता को इन पेय पदार्थों से पूरा करना ग़लत है। इन्हें बनाने वाली कंपनियों के बजट काफी बड़े हैं और उन्हें रीसर्च में फेरबदल करने और सरकारों की व्यापारिक नीतियों को प्रभावित करने के लिये जाना जाता है।

लेकिन अब यह बात दुनिया के सामने आ चुकी है -- मिलेनियल्स को प्रभावित करने वाली मोटापे की महामारी के पीछे इन पेय पदार्थों का सबसे बड़ा हाथ बताया जा रहा है।

चीनी वाली चीज़ें - सिर्फ ये पेय ही नहीं - ब्लड शुगर स्तरों को तेज़ी से ऊपर ले जाती हैं, जो फिर तेज़ी से नीचे गिरता है, जिसके कारण इस कमी को पूरा करने की तेज़ इच्छा होती है। साथ ही ऊर्जा के तेज़ स्रोत के रूप में चीनी के इस्तेमाल के पीछे भी यही कारण है।

अकाल के दौर में चीनी आहार का सबसे अच्छा विकल्प हुआ करती थी। और तभी से यह सिलसिला शुरू हुआ।

लेकिन अब इसे ख़त्म करने की ज़रूरत है, क्योंकि अब हमारी जीवनशैलियाँ काफी हद तक स्थिर हो चुकी हैं।

क्या करें

मीठी चीज़ों को छोड़ना, ख़ास तौर पर पेय पदार्थों को, सिगरेट या शराब छोड़ने जितना ही (या उससे भी ज़्यादा) मुश्किल हो सकता है।

पेश हैं कुछ सुझाव, जो आपकी मदद कर सकते हैं।

इन पेय पदार्थों को अपने फ्रिज में रखना बंद करें। मीठी चीज़ों के लालच से छुटकारा पाने के लिये फल खाना शुरू करें।

ऐसी कई आकर्षक बोतलें उपलब्ध हैं, जिनमें फलों के टुकड़े अलग तैरते रहते हैं और आपके पानी में घुलते रहते हैं। यह देखने में अच्छा लगता है और आप इसे ज़रूर पीना चाहेंगे।

चीनी वाले पेय पदार्थों की जगह फलों के पेय या शेक्स पीना शुरू न करें। ये कैलरी से लदे होते हैं और यह फल खाने का सही तरीका नहीं है।

अगर आपको रस, या फ़्लेवर्ड ड्रिंक्स पीने की इच्छा हो, तो सब्ज़ियों के रस पियें।

और इसके लिये दुकान न जायें; घर पर बनायें।

यह कदम उठाने पर आप चीनी वाले पेय पदार्थों को आसानी से दूर रख पायेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि कठिन व्यायाम मुंह में मिठास का एहसास बढ़ा देते हैं। शायद शारीरिक गतिविधि से मुक्त होने वाले एन्डॉर्फिन्स भी चीनी के विकल्प के रूप में काम करते हैं।

इसलिये, अगर आपको चीनी वाले पेय पदार्थ पीने की आदत है, तो नियमित व्यायाम द्वारा इस आदत से लड़ें।

Kind courtesty Star512/Creative Commons

*फोटोग्राफ: Star512/Creative Commons के सौजन्य से

स्थिर जीवनशैली

अधिकांश मिलेनियल्स स्थिर नौकरियों में हैं। इस पीढ़ी के किसान भी उतनी मेहनत नहीं करते, जितने उनके बाप-दादा किया करते थे। हर चीज़ अब तकनीक पर आधारित है, और डेस्क पर बैठे-बैठे हो जाती है।

मिलेनियल्स के मोटापे में इसका बड़ा हाथ है।

एक और दिलचस्प बात यह है कि कई मिलेनियल्स अपना परिवार होने के बाजजूद अपने माता-पिता के साथ रहते हैं, इसलिये उन्हें लाड़-प्यार की आदत है।

घर और काम, दोनों जगह स्थिर जीवनशैली होने के कारण मुश्किल दुगुनी हो गयी है।

इस पीढ़ी का मनोरंजन भी स्थिर है -- सोशल मीडिया का विस्तार, अन्य मिलेनियल्स के साथ पार्टी करना, जो स्वास्थ्य को लेकर उतने ही लापरवाह हैं, टेलीविज़न देखना या इलेक्ट्रॉनिक गेम्स खेलना।

बेबी बूमर्स कम से कम योग और समुद्र के किनारों की सैर जैसे काम करते थे।

मिलेनियल्स की अगली पीढ़ी उस शिकंजे से बाहर आने की कोशिश कर रही है, जिसमें मिलेनियल्स फँसे हुए हैं।

लेकिन मिलेनियल्स संतुष्ट हैं और यहाँ से हिलना नहीं चाहते।

हर साल कोई न कोई नया रीसर्च नयी तरह की बीमारियाँ सामने लाता है, जो सिर्फ मिलेनियल्स को हो रही हैं -- कैंसर और क्रोनिक किडनी रोग।

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ने कैंसर के 12 ऐसे प्रकारों की पहचान की है, जो मोटापे से जुड़े हैं। इनमें से, मिलेनियल्स ख़ास तौर पर कोलोरेक्टल (अंत्र-मलाशय), बच्चेदानी और पित्ताशय के कैंसर से प्रभावित होते हैं।

क्या करें

समाधान आसान है।

चलिये!

स्थिर जीवनशैली लंबे समय तक धुम्रपान करने जितनी ही या उससे ज़्यादा हानिकारक है। इससे हड्डियों के घटने, मांसपेशियों के घटने, वसा जमा होने, रक्तवाहिनियों के ढीले पड़ने, हृदय और श्वसन प्रणाली की कमज़ोरी जैसी कई समस्याऍं होती हैं।

चलना-फिरना इन सभी को दूर रखता है।

बगल का जिम जॉइन करें।

डांस क्लास जायें।

आपके कदम गिनने वाले ऐप्स या उपकरण इंस्टॉल करें, जो आपको हृदय संबंधी पॉइंट्स देते हैं और चलने-फिरने के लिये प्रेरित करते हैं।

वीकेंड पर अपना पूरा ज़ोर न लगायें (ऐसा करने पर चोट की संभावना बढ़ जाती है)। सप्ताह में कम से कम पाँच दिन व्यायाम करें।

अगर पूरे दिन आप डेस्क पर रहते हैं, तो छोटे स्ट्रेच ब्रेक्स लेते रहें।

इनसे न सिर्फ आपको शारीरिक रूप से मदद मिलेगी, बल्कि साथ ही आप मानसिक रूप से भी ज़्यादा ध्यान दे सकेंगे और आपकी एकाग्रता बढ़ेगी।

Kind Courtesy Wheeler Cowperthwaite/Creative Commons

*फोटोग्राफ: Wheeler Cowperthwaite/Creative Commons के सौजन्य से

 

गैजेट्स की लत

मिलेनियल ग्रुप की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके माता-पिता उन्हें चुप कराने के लिये उन्हें गैजेट्स दिया करते थे।

इनमें से ज़्यादातर लोग छोटे, सूक्ष्म परिवारों में जन्मे हैं, जिनके माता-पिता नौकरी और लंबी यात्रा के बीच भाग-दौड़ में उलझे हैं।

साथ खेलने वाले ज़्यादा भाई-बहन न होने और ख्याल रखने वाले दादा-दादी या नाना-नानी न होने के कारण इस पीढ़ी ने परिवारजनों की जगह गैजेट्स को अपना लिया।

यह अब उनकी मानसिकता का हिस्सा बन चुका है और वे गैजेट से मनोरंजन पाने की आदी हो चुके हैं -- गेम्स, शोज़, ऑनलाइन दोस्त...

उनका पूरा जीवन गैजेट्स पर आधारित है और गैजेट्स पास न होने पर उन्हें घबराहट होने लगती है।

और इस लत के कई नुकसान हैं -- घर में पड़े रहने की आदत और शरीर को पर्याप्त धूप न मिलना। इससे होने वाली विटामिन डी की कमी से हड्डियों की सघनता कम होती है और श्वसन संबंधी समस्याऍं होने लगती हैं।

गैजेट्स का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने से स्थायी अनिद्रा भी हो सकती है, क्योंकि गैजेट्स से निकलने वाली रोशनी पिनियल ग्रंथि और उसकी मेलाटोनिन उत्सर्जन की क्षमता को प्रभावित करती है।

क्या करें

इस लत को दूर करने के लिये गैजेट का ही इस्तेमाल करें।

फिटनेस प्रोग्राम्स से जुड़े ऐप्स डाउनलोड करें या ऑनलाइन फिटनेस प्रोग्राम्स में शामिल हो कर स्वस्थ जीवनशैली अपनायें। इस प्रकार, गैजेट आपके ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि आपके लिये काम करेगा।

गैजेट के लती की ज़िंदग़ी से आज़ादी पाने के लिये ख़ुद को उनसे दूर रहने के घंटों का ईनाम दें। इससे धीरे-धीरे आपकी उनपर निर्भरता कम होने लगेगी।

ऐसे शौक अपनायें जो गैजेट से जुड़े नहीं हैं -- जैसे कला, बाग़बानी, तैराकी, नृत्य इत्यादि।

साथ ही किताबें पढ़ना (गैजेट पर पढ़ने की जगह) भी बदलाव ला सकता है, आपकी सोच को बदल सकता है और मनोरंजन से जुड़े आपके नज़रिये में बदलाव ला सकता है।

PTI Photo

फोटोग्राफ: पीटीआइ फोटो

लंबे सफ़र

मिलेनियल्स को काम के लिये लंबी दूरियाँ भी तय करनी पड़ती हैं, कभी शहर के भीतर, तो कभी बाहर।

यह एक कुर्सी से बंध कर एक-जगह से दूसरी जगह जाने जैसा है।

साथ ही यह मानसिक रूप से भी थकाने वाला है, यही कारण है कि इस वर्ग को लगता है कि उनके पास खेल-कूद के लिये ताक़त नहीं बची है।

यह समस्या विश्व भर में है और लोगों को लंबी दूरी का सफ़र इसलिये करना पड़ता है क्योंकि शहर के काम वाले हिस्सों में घर की कीमतें आसमान छू रही हैं।

लंबे सफ़र से और भी समस्याऍं जुड़ी होती हैं - कार्डियोवैस्क्युलर समस्याऍं, डायबिटीज़, पानी ठहरना, रीढ़ की समस्याऍं और बाहर निकलने पर भूख मिटाने के लिये खायी जाने चीज़ों से होने वाली पाचन संबंधी समस्याऍं।

क्या करें

हम लंबी दूरी के सफ़र से छुटकारा तो नहीं पा सकते।

लेकिन अगर आपके लिये कोई गाड़ी चला रहा है, तो आप अपनी सीट पर हल्के स्ट्रेच व्यायाम कर सकते हैं।

कुर्सी के कई योगासन और बैठ कर किये जाने वाले व्यायाम ऑनलाइन उपलब्ध हैं। आप अभ्यास के लिये चार्ट्स डाउनलोड कर सकते हैं और कार्यक्रम का पालन कर सकते हैं।

अपना व्यायाम दिन के अंत में नहीं, दिन की शुरुआत में करें।

इस प्रकार, आप दिन भर का चलने-फिरने का कोटा पूरा कर सकेंगे।

बहुत ज़्यादा लंबे फिटनेस प्लान्स न बनायें, कम से कम शुरुआत में ऐसा करने से बचें।

सप्ताह के कुछ दिन भारी व्यायाम करने से ज़्यादा अच्छा होता है रोज़ कुछ न कुछ करना, भले ही यह सिर्फ 15 मिनट के लिये क्यों न हो।

इस एक आसान निवेश के साथ, आप अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार  देखेंगे।


शमीम अख़्तर हेल्थ कॉलमिस्ट, योग संबंधी किताबों की लेखक और योग प्रशिक्षक फिटनेस की अनुभवी जानकार हैं।

रिडिफ़.कॉम और शमीम का सुझाव है कि इस स्तंभ में दिये गये सुझावों का पालन हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही किया जाना चाहिये।

*दी गयी तसवीरें सिर्फ उदाहरण के लिये हैं।


क्या आप स्वस्थ जीवन पर अपने विचार साझा करना चाहेंगे? यदि जवाब हां है तो नीचे दिए गए मैसेज बोर्ड में पोस्ट कर दीजिए।

योग आचार्य शमीम अख़्तर
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